नमस्कार आज मैं आपको ग्रामीण जड़ी बूटियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देने जा रहा हूं जो मुझे मेरे दादा जी द्वारा प्राप्त हुई है
आज के ग्रामीण जड़ी बूटियां है चना जिस के अन्य नाम है चाणक हरि मत सकल प्रिय छोला बूटा रहला रोहिल्ला हरबरा
पानी में भिगोए हुए यह आग में भुने हुए चने बलवर्धक एवं रुचिकर होते हैं भीगे हुए चने लघु कसैले वीर्य वर्धक शुक्र को गाढ़ा करने वाले होते हैं साफ की हुए चने को रात्रि के समय चौगुने जल में मिट्टी के पात्र में भिगोकर प्रातः काल शारीरिक अग्नि अनुसार जितनी मात्रा में सरलता से हजम हो जाए उतनी मात्रा में खूब चबाते हुए खाने से बल वीर्य की प्रचुर वृद्धि होती है इसे खाने से पूर्व थोड़ी कसरत या व्यायाम कर लेना और भी उत्तम होता है अधिक मात्रा में सेवन ना करें अन्यथा क्षुधा मंद होने की संभावना होती है
3 तोला से 5 तोला तक की मात्रा में नियमित रूप से प्रातः सेवन करना ठीक होता है यदि और भी उत्तम गुणों की आवश्यकता हो तो रात्रि में भिगोए हुए चनो को प्रातः एक वस्त्र में बांधकर किसी नमी वाले स्थान पर रख दें 2 दिन बाद इसमें जो अंकुरण निकल आते हैं उसमें विटामिन सी की प्रचुरता रहती है तथा यह अंकुरित चने उक्त चनों से अधिक गुणकारी होते हैं जिन्हें प्रातः नाश्ते में दूध के साथ लिया जा सकता है
चाणक रसायन:-- उक्त भिगोए हुए चनो का प्रयोग शक्ति दाता रसायन के रूप में इस प्रकार किया जाता है प्रथम मास में नित्य प्रातः उक्त भिगोए हुए चने जो अंकुरित नहीं है केवल 5तोला तक खाए फिर अगले 2 महीने में दोपहर के बाद भी 5 तोला तक लिया करें चना खाने से पूर्व हल्का सा व्यायाम करें तत्पश्चात थोड़ा सा दूध भी पी ले 3 माह के बाद केवल इन चनों पर ही रहे अन्य कोई भोजन नहीं ले दिन में हर 3 घंटे पर अंकुरित चने ले लिया करें प्रत्येक बार उन्हें खूब चबाना ना भूले इसके बाद दूध भी थोड़ा पी लिया करें इस समय फलों का रस भी लिया जा सकता है ब्रह्मचर्य से रहना जरूरी है 6 महीने के बाद ही शरीर वज्र के समान मजबूत हो जाता है क
इस के प्रयोग में काबुली चने लेना और भी उत्तम होता है यदि कभी भूख ना लगे तथा पेट फूलने लगे तो हिंग्वाष्टक चूर्ण का प्रयोग करना चाहिए
भिगोए हुए चनो का जो जल शेष रह जाता है उसमें मधु (शहद) मिलाकर सेवन करने से नपुंसकता में लाभ होता है इस मधु मिश्रित जल के सेवन से काश में भी लाभ होता है स्वर शुद्धि होती है तथा मूत्र भी खूब खुलकर आता है
त्वचा की शुष्कता तथा खुजली पर :---
इसके आटे में थोड़ा पानी मिलाकर शरीर पर उबटन जैसा मर्दन कर स्नान करने से त्वचा साफ होकर खुजली दूर होती है एवं पसीने की दुर्गंध मिटती है
नपुसंकता पर इसके आटे का हलवा बनाकर खाते हैं वातप्रधान श्वास रोगों में भी यह हलवा लाभकारी है यह निजा अनुभूत है किंतु इसके सेवन काल में पकाया हुआ पानी पीना चाहिए रोगी को यह हलवा हर दूसरे तीसरे दिन भूख के अनुपात से चतुर्थांश ही देना चाहिए शेष हल्के सुपाच्य पदार्थ उदर पूर्ति के लिए दिए जा सकते है
चना चुन को नून बिन 64 दिन जो खाए दाद खाज अरु सहुवा जरा मुंलसे जाए
अर्थात चने के आटे की रोटी बिना नमक के 64 दिन तक खाने से दाद खाज से हुआ रोग जड़ से चला जाता हैचने की अन्य उपयोगिता के साथ में फिर हाजिर होऊंगा मेरी ये पहल आप लोगो को कैसी लगी मुझे जरूर बताएं
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